कर्तव्य

#लोककथा

विश्वविजेता होने का स्वप्न देखने वाले सिकन्दर और उसके गुरु एक बार घने जंगल मे कहीं जा रहे थे। रास्ते मे उफनता हुआ बरसाती नाला पड़ा। अरस्तू और सिकन्दर इस बात पर एकमत न हो सके कि पहले कौन नाला पार करे। दोनो के लिए रास्ता भी अनजान था। नाले की गहराई से दोनो नावाकिफ थे। कुछ देर विचार करने के बाद सिकन्दर ने यह निश्चय किया की नाला वह पार करेगा।

कुछ देर के विवाद के बाद अरस्तू ने सिकन्दर की बात मान ली। पर वे बाद मे इस बात पर नाराज हो गए और बोले तुमने मेरी अवज्ञा क्यों की? इस पर सिकन्दर ने एक ही बात कही-मेरे मान्यवर गुरूजी मेरे कर्तव्य ने ही मुझे ऐसा करने को प्रेरित किया। अरस्तू रहेगा तो हजारों सिकन्दर पैदा कर लेगा,पर सिकन्दर तो एक भी अरस्तू नहीं बना सकता। गुरू,शिष्य के इस उत्तर पर निरुत्तर हो गये।

चार्वाक दर्शन

#दर्शन #लोकायत #Atheism

भारतीय नास्तिक दर्शन मे चार्वाक दर्शन का विशिष्ट महत्व हैं। चार्वाक को लोकायत भी कहा जाता हैं। कुछ जगह उनका नाम बृहस्पति भी बताया गया है।

कुछ विद्वानों का मानना है कि देव गुरु बृहस्पति इस दर्शन के प्रणेता थे,जिनका उद्देश्य राक्षसों को पथभ्रष्ट करना था,लेकिन इसका सही प्रमाण नहीं मिलता। दुर्भाग्य से चार्वाक दर्शन की पुस्तकें उपलब्ध नहीं है। जो पुस्तकें लिखी गई कालान्तर मे उनको नष्ट कर दिया गया। चार्वाक के संस्कृत श्लोक महाभारत,जैन तथा बौद्ध ग्रंथों मे मिलता है।

चार्वाक दर्शन शुद्ध भौतिकवादी दर्शन है। वे पंच तत्वों मे से केवल चार को प्राथमिकता देते थे। आकाश को वे तत्व नहीं मानतें। वे प्रत्यक्ष को ही प्रमाण मानते हैं। उन्होने अंधविश्वास का जमकर विरोध किया। उस समय यह काफी लोकप्रिय भी था।

उनका प्रसिद्ध श्लोक है

यावज्जीवेत सुखं जीवेद ऋणं कृत्वा घृतं पिवेत, भस्मीभूतस्य देहस्य पुनरागमनं कुतः ॥

सिर का बोझ

#जेनकथा

दो विद्वान सत्य के स्वभाव पर सैद्धान्तिक तर्क-वितर्क कर रहे थे। एक साधक उन्हें बहुत देर से चुपचाप देख रहा था। अन्ततः काफी बहस के बाद जब उनमें से एक अपनी बात मनवाने मे सफल हो गया तो जेन साधक ने उससे कहा,`महाशय,आप ज्ञानी पुरुष हैं,मेरी एक जिज्ञासा का समाधान करें।

विद्वान ने कहा,पूछो क्या पूछना हैं?

साधक ने कहा यह भारी पत्थर जो सामने पड़ा हैं,यह यहाँ बाहर हैं या मन मे है?

विद्वान ने कहा,भगवान बुद्ध ने कहा हैं कि सारा बाह्य जगत आंतरिक मन का ही प्रतिरुप हैं। अतः बाहर प्रतीत होने वाला यह पत्थर भी वास्तव में मस्तिष्क ही में हैं।

साधक ने कहा,समझ में नहीं आता,आप सिर पर इतना भारी बोझ लादे क्यों फिरते हैं।

कश्मीर जन्नत या नासूर

#कश्मीर #जन्नत #अलगाववाद

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाला कश्मीर आज पुलिस और सेना की छावनी बन चुका है। कश्मीर मामलें को इतना उलझाया गया है कि अब देश के नीति-नियंताओं को इसका समाधान नहीं मिल रहा है। एक तरफ आतंकवादीयों और अलगाववादीयो को स्थानीय कश्मीरी मुसलमानों का भरपूर समर्थन प्राप्त है वहीं दूसरी और सेना और स्थानीय पुलिस इन आतंकवादियों और अलगाववादीयो को काबू करने का प्रयास कर रही हैं।

वैधानिक तौर पर संपूर्ण जम्मू और कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है। भारतीय स्वाधीनता अधिनियम 1947 के अन्तर्गत देशी रियासतों के संबध मे महत्वपूर्ण शब्द है-पैरा माउन्टसी लैपसेज अर्थात इन रियासतों की सर्वोच्च सत्ता सामाप्त होती हैं। रियासतों को यह निर्णय करना था की वह भारत या पाकिस्तान मे से किसी एक को चुने। कश्मीर के तत्कालीन महाराजा हरिसिंह द्वारा हस्ताक्षर करते ही उनकी रियासत कश्मीर,भारत का अविभाज्य अंग बन गया। कश्मीर के मसले किसी बाहरी देश और संयुक्त राष्ट्र को हस्तक्षेप करने का हक नहीं है।

लेकिन इसे संयुक्त राष्ट्र मे ले जाना हमारी ऐतिहासिक भूल एंव अदूरदर्शिता थी। इस भूल का दुष्परिणाम आज तक भारत झेल रहा है। पूर्व में एक स्वर्णिम समय आया था जब कश्मीर समस्या का समाधान हो सकता था नेहरु भारतीय सेना को कश्मीर आक्रान्ता कबायलियों से मुक्त करने का आदेश दे देते। उस समय हमारी सेना मजबूर थी और उसके पास कारगर हथियार थे। दूसरी तरफ कबायली असंगठित थे और उनके पास बिशेष हथियार भी नहीं थे। उस समय स्थिति भारत के अनुकूल थी।

इस समस्या को आज के परिपेक्ष्य मे देखे तो जाकिर मूसा जैसे आतंकी कश्मीर की आजादी की लडाई नहीं लड़ रहे। वह इसे गजवा-ए-हिंद यानी भारत के हर गैर मुस्लिम के खिलाफ जिहाद।

संगीत औषधि है

#संगीत #संगीत का प्रभाव #रोगोपचार

संगीत मन,शरीर और आत्मा तीनो को बलवान बनाता है। यह ईश्वर का उत्तम वरदान हैं जो मनुष्य को मिला है। संगीत मनुष्य की सृजन शक्ति का विकास करता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है।

बायोकेमिकल सिद्धांतों के अनुसार संगीत मानव शरीर क्रिया पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है। यह प्रभाव मस्तिष्क के सेरेबल कोटक्स एवं आटोनोमिनर्व सिस्टम के माध्यम से पड़ता है।

संगीत की लय और हृदयगति के बीच संबंध के बारे में शोध निष्कर्षों में ‘कानुर्सो’ ने म्यूजिक एंड योर इमोशन में उल्लेख किया है कि संगीत हृदय की अतृप्ति को शांत करता है और भावना को पुष्ट करता है। विशेषकर भारतीय संगीत, संगीत उपचार में अधिक कारगर होते है। भारतीय संगीत की स्वर रचनाऐं ऐसी होती है जो हृदय की धड़कनों की लय एवं स्वर से सामंजस्य रखती हैं कुछ विशिष्ट रागों के द्वारा हृदय की गतिविधियों के साथ संवेदना के सूक्ष्मतमस्तर को स्पर्श कर विकृतियों को दूर किया जा सकता है। यही कारण है कि रक्तचाप को नियंत्रित करने में संगीत विद्यालय के पूर्व कुलपति श्री विमलेंदु मुखर्जी ने रक्तचाप नियंत्रित करने के कई सफल प्रयोग किये है। 50 से भी अधिक लोगों पर रक्तचाप नियंत्रित करने के लिये सन् 1991 में एक नया राग आनंदमयी बनाया। मानव जीवन के स्वर्णिम विठान या जनम से लेकर जीवन की संयाकाल तक संगीत किसी ना किसी रूप में विद्यमान रहता है। बच्चा जनम के साथ ही रोने के रूप में संगीत का प्रारंभ कर देता है। जीवन के हर सोपान में संगीत किसी न किसी रूप में विद्यमान रहता है। संगीत जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संगीत के बिना मनुष्य का जीवन अधूरा है। आज के तनावपूर्ण और भागमभाग के जीवन में अगर मनुष्य संगीत का सहारा ले ले तो सारे तनाव दूर कर एक स्वास्थ्य जीवन व्यतीत कर सकता है। संगीत में वो जादू है जो मुर्दों में प्राण डाल सकता है, क्रोधी को शांत कर सकता है, बीमार तन, मन में नई स्फूर्ति भर सकता है। कई अनुसधांनों में विद्वानों ने यह सिद्ध किया है कि संगीत की सहायता से मनुष्य के शारीरिक और मानसिक विकारों जैसे अपंगता, मूक बाधिरता, और रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) आदि को सुधारा जा सकता है और उन पर विजय पाई जा सकती है। संगीत से हृदयगति को न्यूनतम स्थिति तक लाया जा सकता है ‘मार्क’ राइजर एवं फ्लायर ने ‘जनरल ऑफ म्यूजिक थैरेपी’ (1985) में एक शोधपत्र प्रकाशित किया था। इस रिसर्च के अनुसार संगीत द्वारा तनाव हार्मोन के रूप में जाने वाला कार्टिसोल की मात्रा कम हो जाती है। इसकी कमी से शरीर तनावयुक्त और शांत हो जाता है तथा मांसपेशियों की जकड़न खत्म हो जाती है।

वर्तमान क्षण

एक योद्धा युद्ध में शत्रुओं से घिर कर निहत्था हो गया। शत्रुओं ने घेर कर बाँध लिया और ले जाकर अंधेरी कोठरी मे पटक दिया।

योद्धा को पता था कि अगले दिन उसे यातनाएँ दी जायेगी कड़ी पूछताछ की जायेगी और अन्ततः जान से मार दिया जायेगा। वह बैचेनी से भरा था। छोटी-सी अँधेरी कोठरी मे चहलकदमी कर रहा था। तभी उसे अपने जेन गुरू की एक बात याद आई सत्य जीवन के इसी क्षण मे हैं। बीता हुआ और आने वाला कल केवल मन का छलावा है-माया हैं।

यह ध्यान मे आते ही योद्धा आराम से जमीन पर लेट गया और गहरी नींद मे सो गया।

पाकिस्तान या आतंकिस्तान 

#पाकिस्तान #आतंकवाद #जिहाद

यह सभी जानतें है पाकिस्तान आतंकवादियों के लिए सुरक्षित स्वर्ग है। यह आतंकवादी संगठन भारत के साथ-साथ दूसरे देशो मे भी सक्रिय है। पाकिस्तान इन आतंकवादियों को स्वतंत्रता सैनानी मानती हैं,तभी तो नवाज शरीफ ने u.n मे बुरहान वानी को शहीद और स्वतंत्रता सैनानी माना। 

साउथ एशिया टेरिरिज्म पोर्टल के अनुसार पाकिस्तान मे 35 आतंकी संगठन सक्रिय है। कई संगठनो का रिकॉर्ड ही नहीं वरना यह आंकड़ा कहीं और ज्यादा होता। 

हरकत उल जिहाद अल इस्लाम(हूजी)

इस संगठन की सही जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस संगठन का सरगना मोहम्मद अमजद है। इस संगठन का मुख्य कार्य जम्मू कश्मीर को भारत से आजाद करवाना और देश के हर हिस्से मे शरिया कानून लागू करवाने का पक्षधर है।

2008 के जयपुर बम बलास्ट और समझौता बलास्ट मे इस संगठन का हाथ था।

हरकत उल मुजाहिदीन

1985 मे हूजी के साथ मिलकर हरकत उल अंसार बनाया जिस पर अमेरिका ने पाबंदी लगा दी। यह फिर से पुराने नाम से सक्रिय हो गया।

दिसंबर 1999 मे इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी 814 का हाईजैक किया मौलाना मसूद अजहर और उमर सईद शेख को छुड़ाया। यह संगठन कश्मीर मे सक्रिय हैं।

जैश-ए-मोहम्मद

यह संगठन 2000 से सक्रिय हैं। मसूद अजहर,I.s.i और बिन लादेन की मदद से कराची मे सक्रिय हुआ।

2001 संसद हमला यह संगठन जम्मू कश्मीर मे सक्रिय है। उरी और पठानकोट हमलों की जिम्मेदारी इसी संगठन ने ली थी।

अल बद्र 

1998 से सक्रिय हैं। इसका सरगना बख्त जमीन है।

पाकिस्तान के मंसेरा मे इसका मुख्यालय है। यह 200 सदस्यो का संगठन है। कश्मीर मे होने वाले आतंकी हमलों मे इसका हाथ हैं। 

लश्कर-ए-जब्बार

2001 मे सक्रिय हुआ। सरगना की कोई जानकारी नहीं।

जम्मू कश्मीर मे इस्लामिक ड्रेस कोड लागू करवाने की कोशिश की।

मुत्तहिदा जिहाद काउसिंल 

1990 मे कई जिहादी संगठनो से मिलकर बना सैयद सलाउद्दीन इसका सरगना है। भारत और जम्मू कश्मीर के आतंकी संगठनो को आथिर्क सहायता प्रदान करना और सार्वजनिक मंच प्रदान करना प्रमुख कार्य हैं।

तहरीक उल मुजाहिद्दीन

1990 से सक्रिय शेख जमीन उर्रहमान संगठन का सरगना है। यह पाक अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद से संचालित होता है और I.s.i की मदद से आतंक फैलाता है।

लश्कर-ए-तैय्यबा

इसका सरगना हाफिज सईद हैं। इस संगठन की शुरूआत अफगानिस्तान से की थी अब पाकिस्तान के लाहौर से अपनी गतिविधियां चलाता है। पाक अधिकृत कश्मीर मे कई आतंकी ट्रेनिंग कैम्प चलता है।

कश्मीर को भारत से आजाद करवाने के लिए भारत पर कई हमले किये साल 2000 मे दिल्ली और 2001मे श्रीनगर हवाई अड्डे पर हमला 2008 मे मुंबई हमलो मे इस संगठन का हाथ था। 2017 मे अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले मे इसी संगठन का हाथ था।

पाक मे मौजूद अन्य आतंकी संगठन जो दूसरे देशों मे सक्रिय है

  • तहरीर-ए-तालिबान
  • अल जिहाद
  • जम्मू कश्मीर नेशनल लिबरेशन आर्मी
  • पापुल्य लीग
  • मुस्लिम जांबाज फोर्स 
  • अल जिहाद फोर्स
  • अल उमर मुजाहिद्दीन
  • महज ए आजादी
  • इस्लामी-ए-तुल्बा
  • जम्मू कश्मीर स्टूडेंट लिबरेशन फ्रंट
  • इख्लास अल मुजाहिद्दीन
  • इस्लामिक स्टूडेंट्स लीग 
  • तहरीक ए हुर्रियत कश्मीर
  • तहरीक ए निफाज ए फिकर जाफरिया
  • अल मुस्तफा लिबरेशन फाइटर्स
  • तहरीक ए जिहाद ए इस्लामी
  • मुस्लिम मुजाहिद्दीन
  • तहरीक ए जिहाद 
  • इस्लामी इंकलाब महज

भारत और चीन के संबध 

भारत और चीन के संबध हमेशा से एकतरफा रहे हैं। भारत और चीन के संबध के इतिहास पर नजर डाले तो पता चलता है कि भारत ने सबसे पहले दोस्ती की पहल की थी। जो की उस समय के सरकार की गलती थी। 

https://en.m.wikipedia.org/wiki/China%E2%80%93India_relations 
चीन भारत के साथ व्यापार के साथ भारत के अन्य भू-भागों पर पर हक जताता है। जो कि स्वीकार्य नहीं है। हाालांकि ताजा सीमा विवाद पर दोनों देशो की नजर हैै। 

डोकलाम से भारत और चीन के सैनिक पीछे नही हटने वाले। इससे चीन की बौखलाहट का पता चलता है। चीन की आर्थिक स्थिति अभी कमजोर है इसलिए वह युद्ध नहीं करेगा। 

  • चीन समस्या का समाधान 
  1. भारत के नागरिकों को चीन निर्मित उत्पाद का बहिष्कार करना चाहिए।
  2. भारत सरकार चीन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाये 
  3. भारत चीन से व्यापार मे कटौती करे

इन उपायों से चीन की चाल को पलटा जा सकता हैं।